**सांस्कृतिक साम्राज्यवाद**
--एक संस्कृति का दूसरी संस्कृति पर हमला:
बारह साल पहले लिखा लेख आज और भी प्रासंगिकभों गया है।
सांस्कृतिक साम्राज्यवाद पर विदेशी अंग्रेजी पुस्तकों और पत्रिकाओं में इधर काफी लिखा जा रहा है, लेकिन हमारे यहां इसकी चर्चा बहुत कम हो रही है। यहां तक की संस्कृति पर बात करने का ठेका मानो एक खास तरह की राजनीति करने वालों ने ले रखा है और वे जिस तरह इस पर बात करते हैं, उससे लगता है कि संस्कृति प्राचीनकाल की कोई चीज है, जो धर्म से जुड़ी होती है। जैसे हिन्दू संस्कृति या मुस्लिम संस्कृति। इस तरह देखें तो हमारे यहां संस्कृति को समझना समझाना ही मुश्किल है, सांस्कृतिक साम्राज्यवाद को समझना-समझाना तो दूर की बात है। इसलिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर संस्कृति है क्या।
असल में देखें तो संस्कृति की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। अलग-अलग लोग अलग अलग अर्थों में संस्कृति की बात करते हैं। पुराने जमाने में कहीं इसको खेती-बाड़ी से जोड़कर समझा जाता था, जिसके कारण एग्रीकल्चर और हॉर्टीकल्चर जैसे शब्द आज तक चल रहे हैं, तो कहीं इसको मनुष्य के संस्कार और परिष्कार के रूप में समझा जाता था। लेकिन जब आप सांस्कृतिक साम्राज्यवाद के संदर्भ में संस्कृति को समझाना चाहेंगे तो आपको इसे आधुनिक अर्थों मैं देखना पड़ेगा और पूंजीवाद के विकास के संदर्भ में ,औद्योगिक क्रांति के संदर्भ में, उपनिवेशवाद के संदर्भ में और पूंजीवाद की विरोधी विचारधाराओं के संदर्भ में समझाना पड़ेगा । कहा जाता है कि आधुनिक अर्थों में संस्कृति की चर्चा पश्चिमी देशों में शुरू हुई और तब शुरू हुई जब समाज में पूंजीपति और सर्वहारा नाम के दो नए वर्ग पैदा हुए।
**सस्ते मनोरंजन की चीजों का उत्पादन शुरू**
अब सवाल उठता है जो दूसरा नया वर्ग बना, सर्वहारा, उसके उसके पास तो साहित्य -संगीत और कला वगैरा के लिए फुर्सत का वक्त नहीं था। यहां तक कि शिक्षा भी मयस्सर नहीं थी।
इसलिए वह घटिया चीजों से अपना मनोरंजन करता था। लेकिन वह समाज का बहुत ही बड़ा वर्ग था और पूंजीपति वर्ग जो हर चीज से मुनाफा कमाने की ताक में रहता है, यह ताड़ गया कि इस वर्ग के लिए घटिया और सस्ते मनोरंजन की चीजों का उत्पादन किया जाए , तो वह चीजें खूब बिकेंगी । उधर नई टेक्नोलॉजी ने बड़े पैमाने पर ऐसी चीजों का उत्पादन संभव बना दिया था। प्रेस के जरिए , रेडियो के जरिए , फिल्मों के जरिए और बाद में टेलीविजन के जरिए।
इससे वह चीज पैदा हुई जिसे मास कल्चर कहते हैं । मांस कलर में जो मास शब्द है उसके दो अर्थ होते हैं। एक तो मासेज यानी आम जनता वाला कि आम जनता के लिए सस्ते मनोरंजन की जो चीजें होती हैं ,वह मास कलर है और दूसरा अर्थ मास प्रोडक्शन वाला, यानी वे चीज बड़े भारी पैमाने पर पैदा की जाती हैं, जैसे एक अखबार जिसे लाखों लोग पढ़ते हैं, या एक रेडियो प्रोग्राम जिसे लाखों लोग सुनते हैं, यह एक फिल्म जैसे लाखों लोग देखते हैं।
इसका तीसरा अर्थ यह भी हो सकता है कि मासेज यानी जनता की संस्कृति, क्लासेस यानी शासक वर्गों की संस्कृति से अलग है और घटिया दर्जे की है। लेकिन इन सभी अर्थों में संस्कृति का संबंध पूंजीवाद से है, चाहे उसे आधुनिक संस्कृति। कहा जाए या बुर्जुआ संस्कृति।
मास कल्चर कहा जाए या क्लास कल्चर।
**साम्राज्यवाद का औजार है संस्कृति**
साम्राज्यवाद का एक प्रत्यक्ष रूप होता है और दूसरा परोक्ष । प्रत्यक्ष रूप यह है कि आपने अपनी सैनिक शक्ति के बल पर कहीं जाकर हमला किया और कब्जा कर लिया । लेकिन आज की दुनिया में ऐसा करना आसान नहीं रह गया है । हालांकि आज की दुनिया में भी ऐसे उदाहरण मिल जाते हैं कि अमेरिका ने इराक पर हमला किया और कब्जा कर लिया । लेकिन अमेरिका की इस कार्रवाई का दुनिया भर में विरोध भी हुआ। इसलिए साम्राज्यवाद प्रत्यक्ष रूप के अलावा प्रूफ रूप से भी आता है और तब उसका औजार होती है संस्कृत मसलन जब ब्रिटिश लोग शुरू शुरू में हिंदुस्तान में आए तो यह देखकर दंग रह गए कि यहां तो बड़ी विकसित संस्कृति है अफ्रीका में उन्हें उतनी विकसित संस्कृति नहीं मिली थी इसलिए अफ्रीका को वह आसानी से अपना गुलाम बना सके मगर हिंदुस्तान को गुलाम बनाने में उन्हें काफी वक्त लगा उन्हें खुद की यह बात खुद ही यह बात समझ नहीं मैं वक्त लगा कि हिंदुस्तान को गुलाम बना सकते हैं जहां की संस्कृति उनकी संस्कृति से ज्यादा विकसित है इसलिए उन्होंने यहां की संस्कृति में घुसपैठ करना शुरू किया 1857 में उन्होंने देख लिया कि यहां के लोग उनकी बातों में आने वाले नहीं है इसलिए उन्होंने दूसरा टीका अपनाया एक तरफ तो उन्होंने अपनी सैनिक शक्ति से उसे विद्रोह को कुचल और दूसरी तरफ हिंदुस्तानियों को यह समझना शुरू किया कि तुम लोग असभ्य हो पिछड़े हुए हो तुम्हारे को पास कोई सभ्यता संस्कृति नहीं है और हम तुमसे श्रेष्ठ हैं
**अंग्रेजों ने हमें बरगलाया**
तुम हिंदू और मुसलमान सब अन्धकार में पड़े हुए हो। हम तुम्हारे लिए रोशनी लेकर आये हैं। तुम्हारी संस्कृति बहुत घटिया संस्कृति है और उसके लिए हम एक वरदान की तरह हैं। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के लिए ये दोनों बातें जरूरी थीं। अगर तुम हिंदुस्तानी लोग समझाने-बुझाने से यह मान जाओ कि ब्रिटिश शासन अच्छा है, तो ठीक नहीं तो तुम्हें ठीक करने के लिए हमारे पास सैन्य शक्ति है। लेकिन तुम हमारी बातें मान लोगो तो हमारा काम आसान हो जाएगा। यही है सांस्कृतिक साम्राज्यवाद का परोक्ष रूप। लेकिन
साम्राज्यवाद के लिए अपने प्रत्यक्ष और प्ररोक्ष रुप दोनों ही जरूरी होते हैं। इसलिए संस्कृति हमेशा ही साम्राज्यवाद की एक प्रमुख योजना होती है।
**कई इतिहासकारों ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के बारे में लिखते हुए यह कहा है जैसे मृदुला मुखर्जी और बिपिन चंद्र ने कहा है कि ब्रिटिश लोगों ने 1857 के बाद हमें हर तरह से यह समझना शुरू किया कि एक तरफ तो हम बहुत ताकतवर हैं, बहुत बड़ी सैनिक शक्ति हैं , हम दुनिया की इतनी बड़ी ताकत हैं कि हमारे राज्य में सूरज नहीं डूबता और दूसरी तरफ यह समझाना शुरू किया कि हम तुम्हारे लिए बहुत अच्छे हैं, हम तुम्हारे लिए आधुनिकता लेकर आए हैं।**
**संस्कृति में विभाजन**
देखने में आता है कि विज्ञान पर किसी भी देश का ठप्पा नहीं लगा होता तो फिर संस्कृति को जगहों के संदर्भ में क्यों समझा जाता है? अगर हम देखें तो कहने को तो विज्ञान को भी जगहों से जोड़ा जाता है, जैसे भारतीय विज्ञान, यूरोपीय विज्ञान, पूर्वी विज्ञान, या पश्चिमी विज्ञान, लेकिन यह भी सही है कि विज्ञान के क्षेत्र में वास्तव में ऐसा विभाजन नहीं होता, जैसा संस्कृति के क्षेत्र में किया जाता है।
**विज्ञान और संस्कृति**
जो लोग संस्कृति कर्मी भी हैं और वैज्ञानिक भी उनके सामने सवाल खड़ा होता है कि क्या विज्ञान संस्कृति का अंग नहीं है। संस्कृति के क्षेत्र में कुछ समय पहले कहा गया कि हम एक संस्कृति को दूसरी संस्कृति के संदर्भ में ही समझ सकते हैं । ऐसा मानने वाले लोग संस्कृतियों में भेद करना जरूरी समझते हैं, जैसे हिंदू संस्कृति और मुस्लिम संस्कृति या पूर्व की संस्कृति और पश्चिम की संस्कृति। लेकिन यह बात-बहुत अजीब सी लगने वाली है। इसमें विस्तार से चर्चा की आवश्यकता लगती है। सांस्कृतिक साम्राज्यवाद का मतलब है एक संस्कृति का दूसरी संस्कृति में घुसकर उसका शोषण करना। खास तौर से उस दूसरी संस्कृति का शोषण अपने आर्थिक और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए करना।