रविवार, 10 मई 2026

डिब्बा बंद समाज

डिब्बा बंद समाज!😘😘😘
दिमाग के कपाट खोलकर पढ़िएगा!
यकीन कीजिए आपको कुछ फायदा ही होगा!
कुछ बच गया हो तो अपनी और से जोड़ दीजिएगा! 🙏🙏🙏

दूसरों की दुखती रगों को छेड़कर कोई समाज आगे
नही बढ़ सकता.👍👍👍
जेएनयू का जहाँ नाम आएगा तो बात सोशल
इंजीनियरिंग की नही होगी. बात नाक्सिलियों
पर आकर रुक जायेगी.
 नाम राहुल गाँधी का आयेगा
तो एक तबका बहस को इटली की तरफ मोड़ देगा.

 और महात्मा गाँधी को काउंटर
करना हो तो ब्रह्मचर्य से लेकर बिरला तक की दंत
कथाओं में बहस उलझ जाएगी. 
नज़र सबकी खामियों
पर है!
किसी की खूबी पर नही.।
इस देश में दलित का मतलब कोटा, ।
मुस्लमान का
मतलब पाकिस्तान, 
ब्राह्मण का मतलब मनु, 
बनिए
का मतलब लाला, 
कश्मीरी यानि अलगाव वादी।
जाट का मतलब जटवाडा।
और नार्थ ईस्ट का मतलब चिंकी है ..।
.....नेपाली
..सबके लिए बहादुर हो गया है
 और बहादुर कहा जाने
वाला ठाकुर ...अगर रसूखदार है तो फ्यूडल हो गया
है. !
और अगर  बोद में है तो सिर्फ ठाकर।
 इसाई कनवर्टेड है और शिया ..संघ के मुखबिर.।
 हर
जात पात की कमियां और खामियां हमारी
जुबान पर है.!
 फर्क इतना है कि कुछ लोग अनायास
सामने बोल देते हैं और बाकी पीठ पर. आप क्या करते
हैं इसकी कमजोरियां भी आपसे छीपाई नही जाती
. और मौके पर आपकी वही कमज़ोर नस दबाई जाती
है. पत्रकार हैं तो दलाल बोल देंगे...पुलिस वाले है तो
ठुल्ला हैं, सरकार में हैं तो करप्ट.
पेंशन भोगी हैं तो परजीवी
कोई आंदोलन करो तो आंदोलन जीवी
 प्रक्टिसिंग डाक्टर
हैं तो लुटेरे है!
और PWD के ठेकेदार हैं तो गुंडे!
अगर
मॉडल या एंकर या होस्टेस या रिसेप्शनिस्ट या
जवान नेताईन या यंग डाईवोरसी हैं फिर तो खैर
नही.
ऐसी सोच हम भले ही सार्वजनिक तौर पर ढक लें पर
भीतर ही भीतर ये सोच हमारे समाज को एक नेगेटिव
सिंड्रोम डिसऑर्डर में ले जा रही है. और 75 साल के
बाद ये डिसऑर्डर घटा नही और बढ़ा है. !
दलितों ने
patholgically सवर्णों को एंटी दलित मान लिया है.
ब्राह्मण अब तक खुद को चाणक्य मान रहे हैं
. ठाकुर
की अपनी बेचैनियाँ हैं.
हिंदू किसी मुसलमान बस्ती
में  अपने आप को सुरक्षित नही पाता और मुसलमान हिन्दू बस्ती में एक संदिग्ध ....😭😭
अब तो बात जातियों तक आ चुकी है!
सिर्फ हिंदू या मुसलमान होना ही पर्याप्त नहीं! 😭😭😭
हर परदेश में पैंतीश बनाम... का  मॉडल  बनता जा रहा है! 
चारा खाने वाली राजनीति भाईचारा खाने तक पहूंच गई है! 
उधर लेफ्ट को राईट (संघ) की नेकर
उतारे बगैर चैन नही है.
मोदी की बीजेपी देश में
कांग्रेस मुक्त भारत चाहती है.
 और बी जे पी का आक्षेप कि कांग्रेस तो सता की भूखी है! 
हालांकि सत्ता सभी को चाहिए! 
जनसेवा तो एक मुखौटा है! 
 दोनों एक दूसरे की दुखती रग
पकड़कर आगे बढ़ रहे.
ये एक नेगेटिव सिंड्रोम है और देश इसमें जी कर फंसकर
आगे नही बढ़ सकता है. कोई क्यूँ नही बताता कि हम
बिखर रहे हैं. हम एक दूसरे से अलग हो रहे हैं. हमारा
समाज डिब्बो में बंद होता जा रहा है!
हिंदुत्व का डब्बा!
इस्लाम का डब्बा!
खालिस्तान का डब्बा!
दलित का डब्बा!
ओबीसी का डब्बा! 
डब्बे ही डब्बे!.
जिन डिब्बों को जुड़कर
रेल बनना चाहिए था वो डिब्बे अलग होकर पटरी से
उतर रहे हैं.
लेफ्ट ..एक्सट्रीम लेफ्ट हो रहा है!. राईट ..एक्सट्रीम
राईट ..!
.और शायद सेंटर.. आउट हो गया है.!
 मित्रों
सोचियेगा...कुछ देर इन बंद डिब्बों के बारे में
...गरेबान में झांकियेगा कहीं आप तो किसी डिब्बे
में सीलबंद नही हैं.!
कुलबीर मलिक!
सुप्रभात मित्रों!! 🙏🙏🙏

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